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हायपोथरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ (Hypothermia) वह मेडिकल à¤à¤®à¤°à¤œà¥‡à¤‚सी है जो तब होती है जब बॉडी का तापमान बहत कम होने लगता है यानि कि बॉडी बहà¥à¤¤ जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ठंडी हो जाती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बॉडी उतनी जलà¥â€à¤¦à¥€ गरà¥à¤® नहीं हो पाती है जितनी जलà¥â€à¤¦à¥€ गरà¥à¤®à¥€ छोड़ती है। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तब हो सकती है जब कोई वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ ठंडी जगह पर रह रहा हो, कड़ाके की ठंड में बाहर हो या लंबे समय तक लो टेमà¥â€à¤ªà¤°à¥‡à¤šà¤° में हो। à¤à¤• सामानà¥â€à¤¯ वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर का तापमान 98.6°F (37 C) होता है। लेकिन हायपोथरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ होने पर शरीर का तापमान Hypothermia (hi-poe-THUR-me-uh) 95°F (35 C) हो जाता है।
जब किसी वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के शरीर का तापमान गिरता है तो नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥â€à¤Ÿà¤®, हारà¥à¤Ÿ और अनà¥â€à¤¯ अंग सही तरह से काम नहीं कर पाते हैं। यदि हायपोथरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ को नजरअंदाज किया जाठया समय पर इसका इलाज न किया जाठतो यह हारà¥à¤Ÿ और शà¥â€à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° को पूरी तरह से खराब कर सकता है। जिसके चलते उस वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की मौत à¤à¥€ हो सकती है। ठंडे मौसम या ठंडे पानी के संपरà¥à¤• में आना इस समसà¥â€à¤¯à¤¾ का कारण हो सकता है। हायपोथरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ इलाज में शरीर को गरà¥à¤® कर तापमान को सामानà¥â€à¤¯ करने की कोशिश की जाती है। यदि à¤à¤¸à¤¾ न किया गया तो वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ बेहोश à¤à¥€ हो सकता है।
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